ज़ियारते नाहिया – नौहा इमामे ज़माना (अ.स)

सलाम हो हुसैन (अ:स) पर जिन्होंने इन्तेहाई ख़ुलूस से राहे ख़ुदा में जान निसार कर दी

सलाम हो इस पर जिस ने खिल्वत व जलवत में छिप कर आशकार अल्लाह की इता’अत व बंदगी की

सलाम हो इस पर जिस की कब्र की मिटटी ख़ाके शिफ़ा है

सलाम हो इस पर जिस के हरम की फ़िज़ा में दुआएं क़बूल होती हैं

सलाम हो इस पर के सिलसिले इमामत इस की ज़ुर्रियत से है

सलाम हो पेसर-ए-खत्मी मर्ताबत (अ:स) पर

सलाम हो सय्यद-ए-औसिया (अ:स) के फ़र्ज़न्द पर

सलाम हो फातिमा ज़हरा (स:अ) के बेटे पर

सलाम हो ख़दी’जतुल कुबरा (स:अ) के नवासे पर

सलाम हो सिदरतुल मुन्तहा के वारिस-ओ-मुख्तार पर

सलाम हो जन्नतुल मावा के मालिक पर

सलाम हो ज़मज़म व सफ़ा वाले पर

सलाम हो उस पर जो ख़ाक़ व खून में गलताँ हुआ

सलाम हो उस पर जिसकी सरकार लूटी गयी

सलाम हो किसा वालों की पांचवीं शख्सीयत पर

सलाम हो सब से बड़े परदेसी पर

सलाम हो सरवरे शहीदां पर

सलाम हो उस पर जो बे नंग-ओ-नाम लोगों के हाथों शहीद हुआ

सलाम हो करबला  में आकर बसने वाले पर

सलाम हो उस पर जिस पर फ़रिश्ते रोये

सलाम हो उस पर जिस की ज़ुर्रियत पाको-पाकीज़ा है

सलाम हो दीं के सय्यद-ओ-सरदार पर

सलाम हो उन पर दलाएल-ओ-ब्राहीन की अमाज्गाह हैं

सलाम हो उन पर जो सरदारों के सरदार इमाम हैं

सलाम हो चाक गिरेबानो पर

सलाम हो मुरझाये हुए होटों पर

सलाम हो कर्ब-ओ-अंदोह में घिरे हुए चूर-चूर नफूस पर

सलाम हो उन रूहों पर जिन के जिस्मों क़ो धोके से तहे तेग़ किया गया

सलाम हो बे गोरो-कफ़न लाशों पर

सलाम हो ईन जिस्मों पर धुप कि शिद्द्त से जिन के रंग बदल गए

सलाम हो खून की इन धारों पर जो करबला के दामन में जज़्ब हो गयीं

सलाम हो बिखरे हुए अज़ा पर

सलाम हो इन सरों पर जिन्हें नेजों पर बुलंद किया गया

सलाम हो उन मुखद’देराते इस्मत पर जिन्हें बे-रिदा फिराया गया

सलाम हो दोनों जहानों के पालनहार की हुज्जत पर

सलाम हो आप पर और आप के पाक-ओ-पाकीज़ा आबा-ओ-अजदाद पर

सलाम हो आप पर और आप के शहीद फ़रज़न्दों पर

सलाम हो आप पर और आपकी नुसरत करने वाली ज़ुर्रियत पर

सलाम हो आप पर और आप के क़ब्र के मुजाविर फ़रिश्तों पर

सलाम हो इन्तेहाये मज़लूमियत के साथ क़त्ल होने वाले पर

सलाम हो आप के, ज़हर से शहीद होने वाले भाई पर

सलाम हो अली अकबर (अ:स) पर

सलाम हो कमसिन शीरख़ार पर

सलाम हो इन नाजनीन जिस्मों पर जिन पर कोई कपड़ा नहीं रहने दिया गया

सलाम हो आप के दर-बदर किये जाने वाले ख़ानदान पर

सलाम हो उन लाशों पर जो सहराओं में बिखर गयी

सलाम हो उन पर जिन से उनका वतन छुड़ाया गया
सलाम हो उन पर जिन्हें बगैर कफ़न के दफनाना पड़ा

सलाम हो उन सरों पर जिन्हें जिस्मों से जुदाकर दिया गया

सलाम हो उस पर जिसने  सब्र-ओ-शकेबाई के साथ अल्लाह की राह में जान कुर्बान की

सलाम हो उस मज़लूम पर जो बे यारो मददगार था

सलाम हो पाक-ओ-पाकीज़ा ख़ाक़ में बसने वाले पर

सलाम हो बुलंद-ओ-बाला क़ाभ: वाले पर

सलाम हो उस पर जिसे ख़ुदाए बुज़ुर्ग-ओ-बरतर ने पाक किया

सलाम हो उस पर जिसकी खिदमत गुज़ारी पर जिब्रील क़ो नाज़ था

सलाम हो उस पर जिसे मीकाईल ने गहवारे में लोरी दी

सलाम हो उस पर जिसके दुश्मनों ने उसको और उसके अहले हरम के सिलसिले में अपने अहद-ओ-पैमान क़ो तोड़ा

सलाम हो उस पर जिसकी हुरमत पामाल हुई

सलाम हो जिस का खून ज़ुल्म के साथ बहाया गया

सलाम हो ज़ख्मों से नहाने वाले पर

सलाम हो उस पर जिसे प्यास की शिद्द्त में नोके सिना के तल्ख़ घूँट पिलाए गए

सलाम हो उस पर जिसको ज़ुल्म-ओ-सितम का निशाना भी बनाया गया और उसके ख्याम के साथ उसके लिबास क़ो लूट लिया गया

सलाम हो उस पर जिसे इतनी बड़ी काएनात में यको-तन्हा छोड़ दिया गया

सलाम हो उस पर जिसे यूँ उरयाँ छोड़ा गया जिसकी मिसाल नहीं मिलती

सलाम हो उस पर जिसके दफ़न में बादियाह नशीनोंने हिस्सा लिया

सलाम हो उस पर जिस की शह’रग काटी गयी

सलाम हो दीन के इस हामी पर जिस ने बगैर किसी मददगार के दिफायी जंग लड़ी

सलाम हो इस रेश अक़दस पर जो खून से रंगीन हुई

सलाम हो आप के ख़ाक़ आलूद रुखसारों पर

सलाम हो लूटे और नुचे हुए बदन पर

सलाम हो इस दन्दाने मुबारक पर जिस के छड़ी से बे’हुर्मती की गयी

सलाम हो कटी हुई शह’रग पर

सलाम हो नेज़े  पर बुलंद किये जाने वाले सरे अक़दस पर

सलाम हो ईन मुक़द्दस जिस्मों पर जिन के टुकड़ेसहरा में बिखर गए