waldain ke huqooq

वालिदैन के हुकूक

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सवाल :  बाप को सलाम न करने वाले बेटे के लिए क्या हुक्म है ? और अगर बेटा सलाम करे और बाप जवाब न दे तो उस का वजीफा है ?
जवाब : माँ बाप पर अहसान और उन का एहतेराम वाजिब है हत्ता अगर वोह जवाब न भी दें आप फिर भी उन्हें सलाम करें

सवाल : अगर मैं  अपनी पसंद की सुन्नी लड़की से शादी करने पर इसरार करू तो मुमकिन है मेरे वालिदैन नाराज़ हो जाएं , क्या उन्हें नाराज़ करके उन की  मर्ज़ी के बग़ैर उस से शादी करना जाएज़ होगा ?
जवाब : जाएज़ तो है मगर उनका नाराज़ होना अगर शफ़क़त और मुहब्बत की वजह से है तो बेहतर यह है उस काम को न किया जाये , इस लिए के माँ बाप की नाराज़गी का बुरा असर पड़ सकता है और यह मुमकिन है की इस शादी से आप की औलाद के अकाएद और तरबियत पर मनफी असर पड़े

सवाल : क्या वालिदैन के पैरो को चूमना सवाब रखता है ?
जवाब : अगर उनके एहतेराम और इज्ज़त के लिए हो तो उन के साथ अहसान की फहरिस्त में शुमार होगा

सवाल : मैं एक अट्ठारह सालाह जवान हूँ , शादी मुझ पर वाजिब हो गई है मगर मेरे माँ बाप इस पर तवज्जो नहीं कर रहे हैं , ऐसे में मेरा वजीफा क्या है ?
जवाब : शायद बाप के पास आपकी शादी के लिए पैसे नहीं हैं या वोह अभी मसलेहत नहीं देख रहे हैं , बहरहाल आप कोशिश करके अपने लिए कोई मश्गूलियत कोई काम तलाश करलें ताकि आप का ध्यान शादी की तरफ ज़यादा न जाये

सवाल : क्या वालिदैन बच्चों को मजलिस में शिरकत से रोक सकते हैं और अगर रोकें तो क्या उनकी इतात इस काम में वाजिब है ?
जवाब : अगर वोह शफ़क़त और मुहब्बत की वजह से रोक रहे हैं तो उन की बात न मानना  जाएज़ नहीं है

सवाल : क्या मुस्तेह्बात के अंजाम देने प्रोग्रम्मों और शियार इस्लामी में शिरकत करने के लिए वालिदैन की रज़ाइअत ज़रूरी है ?
जवाब : उन का राज़ी होना शर्त नहीं है मगर मुस्तःबात का अंजाम देना अगर उनकी शफ़क़त की वजह से उन की अज़ीयत का सबब बने तो जाएज़ नहीं है

सवाल : क्या वालिदैन बालिग़ बच्चों पर हिजाब के लिए ज़बरदस्ती कर सकते हैं ?
जवाब : उन्हें हक है लेकिन मार पीट नहीं सकते

सवाल : क्या वालिदैन बच्चों को गाने सुनने और दाडी मूंडवाने से रोक सकते हैं ?
जवाब :  हाँ रोक सकते हैं

सवाल : क्या वालिदैन औलाद को फैशन वाले कपडे पहनने से रोक सकते हैं ?
जवाब : वालिदैन उनकी बाज़ मदद से हाथ खींच सकते हैं जब औलाद उन की बात न मान रही हो तो औलाद भी अपने मकसद तक पहुँचने के लिए मजबूर है की उनकी इतात करे

सवाल :  वालिदैन के इख्तियारात २३ सलाह शादी शुदा बेटे के लिए क्या है ?
जवाब :  उन्हें कोई इख्तियार नहीं है मगर औलाद को उनका अदब व एहतेराम करना चाहिए और उन चीज़ों में उनकी इतात करनी चाहिए जिन में वोह शफ़क़त की वजह से हुक्म नहीं देते या किसी चीज़ से मनह नहीं करते और उस की मुखालिफत से उन्हें तकलीफ होती हो

सवाल : वालिदैन की इतात किस हद तक वाजिब है ?
जवाब : औलाद पर वालिदैन की दो तरह से इतात वाजिब है :
१ : अगर ग़रीब हों तो उन से नेक सलूक और इन्फाक करना , उन की ज़रूरीयात ज़िन्दगी और जाएज़ ख्वाहिशात को एक आम और फितरी ज़िन्दगी के तकाजों के मुताबिक पूरा करना है और उन वजीफों का अंजाम न देना एहसान फरामोशी है
२: अमल और ज़बान से नेक सुलूक करना , अमल और ज़बान से बदतमीजी न करना अगरचे उस पर ज़ुल्म किया हो , हदीस में आया है के अगर माँ बाप औलाद को मारें तब भी उनसे बदतमीजी से पेश न आयें बल्की यह कहें के खुदा तुम को मुआफ करे , यह दोनों वजीफे औलाद के लिए है , जबकि वालिदैन की ज़िम्मेदारी भी औलाद के लिए दो तरह की है :
१: माँ बाप को तकलीफ इस लिए होती है के वोह औलाद का भला चाहते हैं और जो काम वोह अंजाम देते हैं अगरचे उस का उनसे कोई राबता न भी हो उन्हें तकलीफ पहुँचती है , औलाद को ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे उन्हें अज़ीयत हो चाहे वोह उसे मना करें या न करें
२: माँ बाप को इस लिए तकलीफ होती हो के उन में कुछ बुरी आदतें पाई जाती हो जो उन्हें पसंद न हो के उनके बच्चे दुनिया के लिए खैर खावाह हो अगर वालिदैन को बच्चों के ऐसे कामो से अज़ीयत हो तो बच्चों पर उस का असर नहीं पड़ेगा और बच्चों पर उन की इस तरह की तावोकात को पूरा करना वाजिब नहीं है और यहीं से मालूम होता है की वालिदैन अगर बुरे कामो की तरफ हुक्म करें या अच्छे कामो से मनह करें तो उन उनकी इतात वाजिब नहीं है वल्लाह आलम

Source : http://www.sistani.org/urdu/qa/01882/ & Page 2
Marja e Taqleed : Ayatollah Sayyid Ali Sistani