Imame Jamaat ki Shartein

 

इमाम जमात की शर्तें

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१४४२ – इमाम जमात के लिए ज़रूरी है की बालिग  , आकिल , शिया इथनाअशरी , आदिल और हलाल ज़ादा हो और नमाज़ सही पढ़ सकता हो नीज अगर मुक्तदा  मर्द हो तो उस का इमाम भी मर्द होना ज़रूरी है और दस सलाह बच्चे की इक्तिदा सही होना अगरचे वजह से खाली नहीं , लेकिन इश्काल ( शक ) से भी खाली नहीं है  |

१४४३ – जो शख्स पहले एक इमाम को आदिल समझता था अगर शक करे के वोह अब भी अपनी अदालत पर काइम है या नहीं तब भी उस की इक्तिदा कर सकता है |

१४४४ – जो शख्स खड़ा होकर नमाज़ पढता हो वोह किसी ऐसे शख्स की इक्तिदा नहीं कर सकता जो बैठ कर या लेट कर नमाज़ पढता हो और जो शख्स बैठ कर नमाज़ पढता हो वोह किसी ऐसे शख्स की इक्तिदा नहीं कर सकता जो लेट कर नमाज़ पढता हो |

१४४५ – जो शख्स बैठ कर नमाज़ पढता हो वोह उस  शख्स की इक्तिदा कर सकता है जो बैठ कर नमाज़ पढता हो लेकिन जो शख्स लेट कर नमाज़ पढता हो उस का किसी ऐसे शख्स की इक्तिदा करना जो लेट के या बैठ कर नमाज़ पढता हो महल इश्काल है |

१४४६ – अगर इमाम जमात किसी उज्र की वजह से नजिस लिबास या तयम्मुम या जबीरे के वुजू ( चोट लग जाने की सूरत में किया हुआ वुजू ) से नमाज़ पढ़े तो उस की इक्तिदा की जा सकती है |

१४४७ – अगर इमाम किसी ऐसी बीमारी में मुब्तिला हो जिस की वजह से वोह पेशाब और पखाना रोक सकता हो तो उस की इक्तिदा की जा सकती है नीज जो औरत मुस्ताहज़ा न हो वोह मुस्ताहज़ा औरत की इक्तिदा कर सकती है |

१४४८ – बेहतर है के जो शख्स जुजाम या बरज का मरीज़ हो वोह इमाम जमात न बने और अहतियात वाजिब यह है की उस ( सजायाफ्ता ) शख्स की जिस पर शरी हद जरी हो चुकी हो इक्तिदा न की जाये |

Ref : http://www.sistani.org/urdu/book/61/3640/ ( URDU )